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Hindi (my poem Automn)

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AUTUMN 

for Norton Hodges

‘And if I were not a tree,
Where would the birds settle?’
Francisco Azuela

The trees blazing with leaves on fire
And these divinely primitive moments of solitude
In the evenings with their countless smells of burning
Serenely welcoming
The clear sinuous air.

Norton, my Friend,
Let us run from the untrammelled elegance of tears!

Do we not still have
The exquisite double pleasure of books,
The pomp of their palaces
Where we finally we may enter
Without powdered wigs or painted faces?

There, beneath the sumptuous gildings of time,
We attend to our poems
There, we will come to know the impermanent river
Of history.

Why would we need to clear away
Forests and felled wood from our gardens?

Let us listen to the words come to us
With their ritual scent
Of black cherries, wild blackberries,
Mint, chervil and kumquat.

Let us read the lines of the immortal poets
With their warm perfume of hazelnuts, of toasted bread,
Of acacia honey and apricots!

And let us wait for the imminent shower
Of pleasant rain
So that our hearts may sleep easily.

No, Norton, my Friend,
The soul’s poetry
Does not know fatigue, everyday cares and lassitude,
Faithful to the grammar of the stars,
It watches over us in every season
To make us lighter,
More true!
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शरद ऋतु
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(नॉर्टन होजेस के लिए)
“अगर में एक पेड़ नहीं होता
पक्षियों का डेरा कहाँ बनता”
फ्रांसिस्को अज़ुएला

अग्नि रुपी पात प्रजल्वित वृक्षों पर
और एकांत के यह देवीय मौलिक क्षण
जो शाम को आती है जलती हुए बू लेकर
शांति से स्वागत करते हैं
उस साफ़ सर्पकृत वायु का.

नॉर्टन ,मेरे मित्र
चलो भाग चलें बेरोक लालित्यपूर्ण आंसुओं से.

क्या नहीं है अभी भी हमारे पास
सर्वोतम दोगुनी ख़ुशी पुस्तकों की
उनके महलों की धूमधाम
जहाँ प्रवेश कर सकें आखिरकार
बगैर पाउडर, कृत्रिम केश या चित्रित चेहरों के ?

वहां, समय के शानदार फिसलाहट के पीछे
हम अपनी कविताओं पर ध्यान देते हैं
जहाँ हम जानेंगे उस शाश्वत नदी की भांति
इतिहास को

क्यों आवश्यक हैं हमें साफ़ करने को
वन और काटी हुई लकड़ियाँ अपने बाग़ बगीचों से ?

आओ आते हुए शब्दों को सुने
जो संस्कारों की खशबू लिए हैं
काली चेरी , जंगली जामुन
पुदीने, शाक और कुमक्वाट सी

आओ पढ़ें अमर कवियों की पंक्तिया
जो पहाड़ी बादाम , अंगार पर सिकी रोटी ,
बबूल के शहद और खुबानी की
उष्ण सुगंध लिए हैं

और आओ हम करें प्रतीक्षा सन्निकट पानी की बौछार की
सुखद बारिश की
ताकि सो सके हमारे दिल बिना कठिनाई के

नहीं मेरे मित्र नॉर्टन
आत्मा की कविता
थकावट, हररोज़ की चिंता और शैथिल्य नहीं जानती
सितारों के व्याकरण के प्रति निष्ठावान
देखभाल करती हैं हमारी हर मौसम में
हमें प्रकाशित करने को
और अधिक सत्यनिष्ठ
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अनुवादक त्रिभवन कौल Translated by Tribhawan Kaul/10-12-2012