Statistiques
Blogspot            ancien site - cliquer ici / old website - click here            Poetrypoem

Hindi - mon poème Palmyre en hindi

PDF
Imprimer
Envoyer


PALMYRE


Je t’aime ! Les mots sont tristes comme un immense départ
Qui doublement sépare le cœur de l’infini !
Je t’aime avec la brise, avec le doux bruit
Des coccinelles qui marchent vers l’ombre du soir !


Je t’aime avec l’aurore qui tremble dans tes yeux,
Avec l’éternité parmi tes cils de lin !
Je t’aime avec les pleurs, avec le temps serein
Des âmes de lumière, de l’air vertigineux !


Je t’aime avec l’abîme dément de l’insomnie,
Avec les caravanes qui veillent sur mon délire,
Avec la force de l’eau et la fureur d’un cri !


Je t’aime ! Ô grande nuit, renverse sur ma Palmyre
Les océans de feu, les myriades de chants,
Les lacs de la tendresse dans l’ambre de son sang !


Athanase Vantchev de Thracy


पल्मीरे
-------------
मुझे तुमसे प्यार है!
लेकिन शब्द दुखी हैं उस जुदाई की तरह
जैसे दूर दूरांतर की भूमि पर जाने से
दिल की जुदाई का दर्द दोगुना हो जाता है अनंत तक...............

मुझे तुमसे प्यार है
उस मंद समीर की भांति जो
अपनी कोमल ध्वनि से प्रेरित करती है सोनपंखी को
सांयकाल की छाया की और...............................

मुझे तुमसे प्यार है
तुम्हारी आँखों में कांपती सुबह की लालिमा की तरह
उस अनंत काल की तरह जो तुम्हारी लिलिन जैसी पलकों में निहित है
प्यार करता हूँ आँखों में अश्रु लिए उस मादक तेज़ वायु की तरह
जो प्रबुध्द आत्माओं को निर्मल करती हैं .................................

मुझे प्यार है तुमसे
उस उन्माद की भांति
जो अनिद्रा की खाई में
पानी की शक्ति की भांति
मेरे प्रलाप को उन्माद प्रधान करती है..........................................

मुझे प्यार है तुमसे.
हे महान रात्रि
मेरे पल्मीरा पर
आग के महासागर उड़ेलना
अनगिनत गीतों के संग
झीलों की कोमल रक्तरंजित भावनाओं के संग...................................
-----------------------------------------------------------------------------------------
Translated in hindi by Tribhawan Kaul - poète d'Inde